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धागा

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क्या थी वह मुलाक़ात समझ नहीं पा रहा. हम एक-दूसरे से अनजान किसी मैदान पर दौड़े जा रहे थे, एक-दूसरे से विपरीत. एक क्षण में हम दोनों दो आँखों में बदल गए. हम दौड़ते हुए ठहर गए. सहसा नहीं, बहुत देर में. हम दो लोग जो चार आँखों में बदल गए थे, बहुत दूर तक दौड़ नहीं पाए. हम एक-दूसरे को दूर तलक देखते रहना चाहते थे. देर तलक एक-दूसरे के सामने ठहर जाना चाहते थे. लेकिन हम एक मैदान में समय की किसी दौड़ में थे. ये एक स्वप्न था और इसे जल्द ही ख़त्म हो जाना था. जब हम आँखों में बदल गए तो कुछ देर तक आँखें ही बने रहे. जब तक हमें समय का भान हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. घड़ी बारह बजा चुकी थी. अब हमें आँखों से दोबारा दो जोड़ी पैरों में तब्दील हो जाना था, और समय की किसी दौड़ में दोबारा भागना शुरू करना था. हमारे मन में सवाल आया क्या इस दौड़ में हम साथ नहीं भाग सकते? अपने से विपरीत दौड़ने से पहले हमने तय किया कुछ देर तक हम साथ में दौड़ेंगे. हमने उस मैदान में दौड़ना शुरू किया. हम कभी बहुत क़रीब आते तो कभी बहुत दूर हो जाते. अपनी बातों में हमने अपने आप को जाना. हम शायद एक-दूसरे के चेहरे को छूना चाहते थे. लेकिन नहीं छुआ. हम ...