संदेश

छत लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बीते दिन

चित्र
उसने कहा था। उस घर से चले जाने के बाद उसे कोई याद नही करेगा। उसे भी पता है उसने झूठ कहा था। मैंने भी अब वो घर छोड़ दिया है। वहाँ भटकता भी नही। बस दिन भटकते हैं। मन भटकता है। उधर नुक्कड़ से सीधा नही जाता। गली में मुड़ जाता हूँ। मुड़ने पर लगता है मेरे पीछे कोई चल रहा है। जो मेरे बैग को ऊपर उठाकर इस तरह छोड़ देगा कि मैं लड़खड़ा जाऊंगा। फिर हँसती हुई एक गाली हवा में तैर जाएगी। मैं बेशक उसे याद नही करता। पर उस रास्ते में कुछ है जो मुझे खींचता है। जो मेरे साथ हमेशा चला आता है।  कभी लगता है मैं वहीं उसी घर में हूँ, अब भी। सुबह उठने से पहले लगता है मेरे पैरों के बिलकुल सामने लोहे का वही नीला दरवाज़ा है। मैं उठूंगा तो दरवाज़े की कुंडी में अखबार में लिपटी फूलमाला टँगी होगी। पर आँख खोलता हूँ तो सामने हल्के पीले रंग की इस दीवार को पाता हूँ। लगता है एक क्षण में दुनिया बदल गई हो। जैसे सपना टूट गया हो। पर वो भ्रम ही होता है। अब तो सपने भी कम आते हैं। लगता है मेरे दिन सपनों में बीत जाते हैं, रात को देख लेने लायक सपने मैं बचा नही पाता हूँ।  सपने सच्चाई में बदल जाने पर उतने रूमानी नही...

छत

चित्र
शाम होते ही हम छत पर चढ़ जाते। लक्की और मैं। दोनों अठन्नी-अठन्नी मिलाकर दो पतंगें ले आते। अँधेरा होने तक हवा में गुथे रहतें। अँधेरे में पतंग उड़ाने की तरकीबें सोचा करते। एक दिन लक्की ने हार मान ली। मैं जुटा रहा। कुछ समय बाद समझ आया कि हवा की दिशा ही पतंग की दिशा हो जाती है। अधिकतर हवा पूर्व दिशा की ओर होती। वहीं जहाँ होटल की दीवार थी। पतंग हमेशा उसमें अटक जाती। एक दिन मैनें भी तय कर लिया कि अब बस पंद्रह अगस्त को ही पतंग उड़ाया करेंगे। उसके बाद पंद्रह अगस्त भी छूट गया। मेरे साथ-साथ सभी ने पतंग उड़ाना छोड़ दिया।  कानों में लीड ठूँसे एफ.एम. पर चल रहे गाने को दोहराने के साथ-साथ उन चारों रसोइयों पर पक रहे खाने और हो रही घटनाओं को भी देखता रहता। बिल्डिंग वाली अम्मा अपने कमरे से बाहर आतीं तो उनसे राम-राम कर लेता। पूजा दीदी और अपना घर तबतक बेच चुके थे। होली पर छत पे चढ़कर एक दूसरे पर निशाना लगाकर गुब्बारे मारना और चूक जाना भी अब बीती बात हो गई थी। लक्की ने ग्यारहवीं में कॉमर्स ले ली। मैंने आर्ट्स। इन दोनों ही का मतलब हम नहीं जानते थे। मैं गणित नहीं समझ पाता था, पर इतिहास समझ जाता था। लक्...