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वे दोनों

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ये पहली मंज़िल है। बाहर कड़ी धूप है। इस कमरे में केवल हम नहीं बैठे। हम लड़के-लड़कियों के अलावा एक युगल भी बैठा है। हम लड़के और लड़कियाँ ना चाहते हुए भी किसी न किसी बहाने से अचानक उन्हें देख लेने की इच्छा से भरे हुए हैं। वो दोनों बहुत धीमें से आपस में बात कर रहे हैं। वो नही चाहते कि कोई उनकी एक भी बात सुने। वो अपने अलग टापू पर हैं। वो अपनी इस दुनिया को अपनी पीठ से ढक लेना चाहते हैं। हम अपनी इस दुनिया से उन्हें देख रहे हैं। उन्हें इस तरह एक-दूसरे का हाथ पकड़े देखकर हम सभी कोई प्रतिक्रिया नही दे रहे। हम सब बातों में लगे हैं यही हमारी प्रतिक्रिया है। हम सभी लड़के-लड़कियाँ उन दोनों की ही तरह बैठ जाना चाहते हैं। इस बात से जो इनकार कर रहा है वह झूठा है। 
वे लड़का और लड़की दोनी ही यहाँ से अनुपस्थित है। वो इस समय से टूट गए हैं उनकी स्मृति में रह गए हैं एक दूसरे के कंधे, हाथ और होंठ। मैं ये बार-बार कहता हूँ कि प्रेम तोड़ता भी है। ये टूटना ही अनुपस्थित होना है कई आयोजनों से, रिश्तों से, यादों और बातों से। उन दोनों की ही तरह यहाँ बैठे हम सब भी कंधे, हाथ और होंठ हो जाना चाहते हैं इनके अलावा और बहुत कुछ भी जिस…